shrikalhasti rahu ketu pooja
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Srikalahasti Rahu Ketu Pooja Timings (श्रीकालहस्ती मंदिर)

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Srikalahasti Rahu Ketu Pooja Timings (श्रीकालहस्ती मंदिर), Online Booking & Price Guide

आंध्र प्रदेश के छोटे से पवित्र नगर श्रीकालहस्ती में स्थित श्रीकालहस्ती मंदिर, दक्षिण भारत के सबसे प्रसिद्ध शिव मंदिरों में से एक है। यह मंदिर विशेष रूप से राहु-केतु पूजा और काल सर्प दोष निवारण पूजा (Kaal Sarpa Dosha Pooja) के लिए पूरे भारत और विदेशों से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। अगर आप भी राहु-केतु दोष से मुक्ति पाने के लिए इस मंदिर में दर्शन और पूजा करने की योजना बना रहे हैं, तो यह लेख आपको पूजा के समय, बुकिंग प्रक्रिया, कीमत, इतिहास, दर्शनीय स्थल, यात्रा के साधन और ठहरने की सुविधाओं की पूरी जानकारी देगा।

श्रीकालहस्ती मंदिर का इतिहास (History of Srikalahasti Rahu Ketu)

श्रीकालहस्ती मंदिर को दक्षिण भारत का “कैलाश” कहा जाता है, और मंदिर के पास बहने वाली छोटी नदी को “दक्षिण की गंगा” के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर पंचभूत स्थलम में से एक है और भगवान शिव के वायु लिंग स्वरूप का प्रतिनिधित्व करता है, जिन्हें यहाँ कालहस्तीश्वर के नाम से पूजा जाता है।

मंदिर का आंतरिक भाग लगभग 5वीं शताब्दी में बनाया गया माना जाता है, जबकि बाहरी संरचना का निर्माण 12वीं शताब्दी में चोल और विजयनगर राजाओं द्वारा करवाया गया था। मंदिर के भीतर के स्तंभ आज भी उतने ही मजबूत और सुरक्षित दिखते हैं जितने सैकड़ों वर्ष पहले थे, क्योंकि इन्हें प्राकृतिक क्षरण से बचाकर रखा गया है। मंदिर की स्थापत्य कला और आध्यात्मिक ऊर्जा इसे भारत के सबसे महत्वपूर्ण शिव धामों में शामिल करती है।

राहु-केतु पूजा क्या है और क्यों जरूरी है (Rahu Ketu Pooja)

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु और केतु प्रतिकूल स्थिति में होते हैं, तो इसे काल सर्प दोष (Kaal Sarp Dosha Pooja) कहा जाता है। इस दोष के कारण व्यक्ति को करियर, विवाह, स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन में लगातार बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। श्रीकालहस्ती मंदिर को राहु-केतु दोष निवारण के लिए भारत का सबसे शक्तिशाली स्थान माना जाता है।

यहां पुजारी वैदिक विधि-विधान से विशेष पूजा-अनुष्ठान करवाते हैं, जिसमें अभिषेक, मंत्रोच्चारण और हवन शामिल होते हैं। मान्यता है कि यह पूजा करवाने से व्यक्ति के जीवन से राहु-केतु के दुष्प्रभाव कम हो जाते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग खुलता है।

राहु-केतु पूजा और मंदिर दर्शन के समय (Rahu Ketu Pooja Timings)

  • मंदिर दर्शन समय: सुबह 6:00 बजे से रात 9:00 बजे तक
  • राहु-केतु पूजा / काल सर्प दोष पूजा: प्रतिदिन सुबह 6:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक
  • अभिषेकम: शनिवार, रविवार और सोमवार को सुबह 5:30, 6:30 और 10:00 बजे; मंगलवार से शुक्रवार तक सुबह 6:00, 7:00 और 10:00 बजे; प्रदोष अभिषेकम शाम 5:00 बजे (शुक्रवार को शाम 4:00 बजे)
  • सुप्रभात सेवा: सुबह 5:00 से 5:30 बजे (शनि-रवि-सोम), 5:30 से 6:00 बजे (मंगल-शुक्र)
  • गोपूजा: सुबह 4:30 से 5:00 बजे (शनि-रवि-सोम), 5:00 से 5:30 बजे (मंगल-शुक्र)

पूजा के लिए मंदिर जल्दी पहुंचना बेहतर रहता है क्योंकि सुबह के समय भीड़ अपेक्षाकृत कम होती है और पुजारी आपको आराम से पूजा-विधि समझा पाते हैं।

राहु-केतु पूजा टिकट प्राइस (Rahu Ketu Pooja Ticket Price)

श्रीकालहस्ती मंदिर में राहु-केतु पूजा के लिए अलग-अलग श्रेणियों में टिकट उपलब्ध हैं:

पूजा टिकट श्रेणीकीमत (लगभग)
सामान्य टिकट₹500
विशेष टिकट₹750
प्रीमियम टिकट₹1,500
VIP टिकट₹2,500
विशेष VIP टिकट₹5,000

नोट: टिकट की कीमतें समय-समय पर बदल सकती हैं, इसलिए बुकिंग से पहले मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट या काउंटर से नवीनतम जानकारी जरूर लें।

ऑनलाइन बुकिंग कैसे करें (Rahu Ketu Pooja Online Booking)

राहु-केतु पूजा के लिए टिकट ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से बुक किए जा सकते हैं:

  1. मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर “Rahu Ketu Pooja” सेक्शन में उपलब्ध स्लॉट चुनें।
  2. अपनी यात्रा की तारीख और पूजा श्रेणी का चयन करके भुगतान करें।
  3. बुकिंग कन्फर्मेशन प्राप्त होने पर उसका प्रिंट या स्क्रीनशॉट अपने साथ रखें।
  4. जो श्रद्धालु ऑनलाइन बुकिंग नहीं कर पाते, वे मंदिर परिसर में मौजूद काउंटर से सीधे टिकट ले सकते हैं। हालांकि त्योहारों और वीकेंड में लंबी कतार से बचने के लिए एडवांस बुकिंग की सलाह दी जाती है।

मंदिर के आसपास दर्शनीय स्थल

श्रीकालहस्ती मंदिर आते समय आप इन जगहों पर भी घूम सकते हैं:

  • मंदिर परिसर की स्थापत्य कला: मंदिर के प्राचीन स्तंभ, गोपुरम और शिल्पकला देखने लायक हैं।
  • कन्नप्पा मंदिर: भगवान शिव के परम भक्त कन्नप्पा से जुड़ा स्थान।
  • तिरुपति बालाजी मंदिर: श्रीकालहस्ती से लगभग 35-40 किमी दूर स्थित विश्व प्रसिद्ध वेंकटेश्वर मंदिर, जहां अधिकांश श्रद्धालु एक ही यात्रा में दर्शन के लिए जाते हैं।
  • स्थानीय बाजार: मंदिर के आसपास पारंपरिक हस्तशिल्प, कलमकारी पेंटिंग और पूजा सामग्री की खरीदारी की जा सकती है।

श्रीकालहस्ती कैसे पहुंचे (How to Reach)

श्रीकालहस्ती सड़क, रेल और वायु मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

हवाई मार्ग से

सबसे नजदीकी हवाई अड्डा तिरुपति एयरपोर्ट है, जो मंदिर से लगभग 25-40 किमी की दूरी पर स्थित है। यहां से टैक्सी या बस के जरिए आसानी से श्रीकालहस्ती पहुंचा जा सकता है।

रेल मार्ग से

श्रीकालहस्ती का अपना रेलवे स्टेशन है, जो चेन्नई, बेंगलुरु और तिरुपति जैसे प्रमुख शहरों से जुड़ा है।

सड़क मार्ग से

बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे प्रमुख शहरों से नियमित बस सेवाएं उपलब्ध हैं। निजी टैक्सी और कैब बुकिंग भी एक सुविधाजनक विकल्प है।

मुंबई से श्रीकालहस्ती कैसे पहुंचे

मुंबई से सबसे तेज़ विकल्प है तिरुपति के लिए फ्लाइट लेना, फिर सड़क मार्ग से लगभग 1-1.5 घंटे में श्रीकालहस्ती पहुंचना। ट्रेन से यात्रा करने वालों के लिए मुंबई से तिरुपति/रेणिगुंटा के लिए सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं, जहां से श्रीकालहस्ती की दूरी लगभग 40 किमी है।

दिल्ली से श्रीकालहस्ती कैसे पहुंचे

दिल्ली से तिरुपति के लिए सीधी फ्लाइट सबसे सुविधाजनक विकल्प है। इसके अलावा दिल्ली से चेन्नई या तिरुपति के लिए लंबी दूरी की ट्रेनें भी चलती हैं, जिसमें लगभग 24-30 घंटे का समय लगता है। फ्लाइट से यात्रा समय काफी कम हो जाता है।

कोलकाता से श्रीकालहस्ती कैसे पहुंचे

कोलकाता से तिरुपति के लिए सीधी फ्लाइट उपलब्ध है। ट्रेन से यात्रा करने वालों के लिए कोलकाता से चेन्नई या तिरुपति रूट की ट्रेनें विकल्प के रूप में उपलब्ध हैं, हालांकि इसमें समय अधिक लगता है।

उत्तर प्रदेश से श्रीकालहस्ती कैसे पहुंचे

लखनऊ, वाराणसी, कानपुर जैसे शहरों से तिरुपति के लिए सीधी या कनेक्टिंग फ्लाइट्स उपलब्ध हैं। ट्रेन से यात्रा करने वाले श्रद्धालु उत्तर प्रदेश के प्रमुख स्टेशनों से तिरुपति/रेणिगुंटा के लिए ट्रेन पकड़ सकते हैं, जहां से श्रीकालहस्ती की दूरी टैक्सी या बस से आसानी से तय की जा सकती है।

ठहरने के विकल्प – होटल और धर्मशाला

श्रीकालहस्ती में हर बजट के अनुसार ठहरने के विकल्प उपलब्ध हैं:

  • बजट होटल: मंदिर के नजदीक कम कीमत में साधारण कमरे उपलब्ध हैं, जो अकेले यात्रियों और छोटे बजट वालों के लिए उपयुक्त हैं।
  • मिड-रेंज और फैमिली होटल: परिवार के साथ आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाओं वाले होटल भी आसानी से मिल जाते हैं।
  • प्रीमियम होटल: आधुनिक सुविधाओं के साथ आरामदायक ठहरने के लिए प्रीमियम श्रेणी के होटल भी उपलब्ध हैं।
  • धर्मशाला: पारंपरिक तीर्थयात्रियों के लिए मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय संस्थाओं द्वारा संचालित धर्मशालाएं किफायती दरों पर उपलब्ध हैं, जो विशेष रूप से पूजा के लिए आने वाले भक्तों के बीच लोकप्रिय हैं।

सुझाव: वीकेंड, त्योहारों और विशेष पूजा तिथियों (जैसे महाशिवरात्रि) के दौरान होटल और धर्मशाला की मांग बढ़ जाती है, इसलिए यात्रा से पहले ही एडवांस बुकिंग करना बेहतर रहता है।

श्रीकालहस्ती मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और स्थापत्य कला का अद्भुत संगम है। यहां की राहु-केतु पूजा और काल सर्प दोष निवारण अनुष्ठान देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखते हैं। यात्रा की सही योजना, समय पर बुकिंग और उचित ठहरने की व्यवस्था के साथ आप इस पवित्र यात्रा को सुखद और यादगार बना सकते हैं।

नोट: पूजा समय, टिकट कीमतें और बुकिंग प्रक्रिया में बदलाव हो सकता है, इसलिए यात्रा से पहले मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट से जानकारी जरूर सत्यापित कर लें।

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